शालीन अग्रवाल | 15 जनवरी 2026 | 13:57 IST
संक्षिप्त झलक
- रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की Q3 FY26 में आय 6% और मुनाफा 4% बढ़ने का अनुमान
- ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार में सुधार से मिलेगा सहारा
- जियो और रिटेल से स्थिर ग्रोथ की उम्मीद
- रिफाइनिंग मार्जिन और थ्रूपुट में बढ़ोतरी से अपस्ट्रीम कमजोरी की भरपाई संभव

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) से वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में स्थिर और संतुलित प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, कंपनी के रिफाइनिंग और ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार में सुधार, साथ ही जियो टेलीकॉम और रिलायंस रिटेल जैसे उपभोक्ता व्यवसायों की लगातार बढ़त, अपस्ट्रीम तेल-गैस सेगमेंट की कमजोरी की भरपाई कर सकती है।
जहां एक ओर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से अपस्ट्रीम सेगमेंट पर दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, मजबूत थ्रूपुट और उपभोक्ता कारोबार की स्थिर आय से कंपनी की कुल वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रह सकती है।
FY26: आय और मुनाफे में मध्यम वृद्धि की उम्मीद
छह प्रमुख ब्रोकरेज हाउस के अनुमानों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की Q3 FY26 की कुल आय लगभग 2.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में करीब 6% की वृद्धि दर्शाता है।
वहीं,
- EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास से पहले की कमाई): लगभग 47,900 करोड़ रुपये, यानी 10% की वृद्धि
- शुद्ध मुनाफा (PAT): करीब 19,200 करोड़ रुपये, यानी 4% की बढ़ोतरी
हालांकि, अलग-अलग ब्रोकरेज के अनुमान काफी अलग हैं। कुछ विश्लेषक जहां दो अंकों की ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि नतीजे सीमित दायरे में रह सकते हैं।
मुनाफे के अनुमान 0% से लेकर 15% तक की वृद्धि के बीच बताए जा रहे हैं, जो मुख्य रूप से रिफाइनिंग मार्जिन, पेट्रोकेमिकल स्प्रेड और उपभोक्ता कारोबार की रिकवरी पर निर्भर करेगा।
कारोबार: कमाई की रीढ़ बनेगा
रिलायंस का ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार इस तिमाही में कमाई का सबसे बड़ा आधार बनने की संभावना है।
रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार
सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में हाल के महीनों में सुधार देखा गया है, जिससे रिलायंस की रिफाइनिंग यूनिट को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, रिफाइनरी थ्रूपुट में भी बढ़ोतरी हुई है, यानी ज्यादा कच्चे तेल की प्रोसेसिंग संभव हुई है।
पेट्रोकेमिकल स्प्रेड अभी भी कमजोर
हालांकि, पेट्रोकेमिकल सेगमेंट में मार्जिन अब भी दबाव में हैं। वैश्विक मांग में सुस्ती और सप्लाई अधिक होने के कारण इस सेगमेंट में सुधार सीमित रहा है।
इसके बावजूद, ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि रिफाइनिंग से होने वाली अतिरिक्त कमाई पेट्रोकेमिकल की कमजोरी की भरपाई कर देगी।
ICICI सिक्योरिटीज के अनुसार:
“रिटेल, जियो और O2C सेगमेंट से साल-दर-साल कमाई में वृद्धि की उम्मीद है। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन O2C के प्रदर्शन को सहारा देंगे।”
उपभोक्ता कारोबार: रिलायंस की ताकत
रिलायंस के कंज्यूमर बिज़नेस – यानी जियो टेलीकॉम और रिलायंस रिटेल – कंपनी की आय को स्थिरता प्रदान कर रहे हैं।
जियो टेलीकॉम
जियो की कमाई में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है:
- ARPU (प्रति ग्राहक औसत आय) में वृद्धि
- नए सब्सक्राइबर का जुड़ना
5G सेवाओं के विस्तार और डिजिटल सेवाओं की मांग के चलते जियो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट स्थिर रूप से बढ़ रहा है।
रिलायंस रिटेल
रिलायंस रिटेल की स्थिति भी धीरे-धीरे सुधर रही है।
- स्टोर्स की बेहतर परफॉर्मेंस
- ई-कॉमर्स और ओम्नी-चैनल रणनीति
- मार्जिन में स्थिरता
Yes Securities के अनुसार:
“जियो में ARPU और सब्सक्राइबर ग्रोथ जारी रहेगी, जबकि रिटेल सेगमेंट में बढ़ती बिक्री के साथ EBITDA मार्जिन स्थिर रहने की उम्मीद है।”
अपस्ट्रीम कारोबार: दबाव बना रहेगा
रिलायंस का तेल और गैस उत्पादन (अपस्ट्रीम) कारोबार इस तिमाही में कंपनी के लिए चुनौती बना रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
Q3 FY26 के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई। इससे रिलायंस को मिलने वाली वास्तविक बिक्री कीमत (realisation) कम हुई।
उत्पादन से मिलने वाली कमाई पर असर
कम कीमतों के कारण अपस्ट्रीम सेगमेंट की कमाई में साल-दर-साल गिरावट या सीमित वृद्धि की संभावना है।
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक:
“सॉफ्ट क्रूड प्राइस और कमजोर रियलाइज़ेशन के चलते अपस्ट्रीम सेगमेंट का योगदान सीमित रहेगा।”
समग्र प्रदर्शन: संतुलित लेकिन सतर्क उम्मीद
हालांकि कुछ सेगमेंट में चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन कुल मिलाकर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से स्थिर तिमाही प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
सकारात्मक कारक
- बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन
- जियो और रिटेल की निरंतर ग्रोथ
- O2C कारोबार में सुधार
नकारात्मक कारक
- पेट्रोकेमिकल स्प्रेड कमजोर
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
- अपस्ट्रीम सेगमेंट पर दबाव
इन सभी कारकों को मिलाकर देखा जाए, तो रिलायंस की कमाई में मध्यम लेकिन स्थिर वृद्धि संभव है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, और इसके नतीजे पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं।
Q3 FY26 के परिणामों से निवेशकों को यह संकेत मिल सकता है कि:
- O2C कारोबार में रिकवरी कितनी मजबूत है
- जियो और रिटेल की ग्रोथ कितनी टिकाऊ है
- अपस्ट्रीम दबाव कितने समय तक रहेगा
अगर रिफाइनिंग और उपभोक्ता कारोबार उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो शेयर में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ Q3 FY26 में न तो बहुत कमजोर और न ही बहुत मजबूत, बल्कि संतुलित प्रदर्शन की ओर बढ़ती नजर आ रही है।
जहां एक ओर अपस्ट्रीम सेगमेंट दबाव में है, वहीं दूसरी ओर रिफाइनिंग, जियो और रिटेल जैसे मजबूत स्तंभ कंपनी की कमाई को सहारा दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में कंपनी के वास्तविक नतीजे यह स्पष्ट करेंगे कि यह संतुलन कितना मजबूत है और FY26 की दूसरी छमाही में रिलायंस की ग्रोथ किस दिशा में जाएगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
Moneycontrol नेटवर्क18 समूह का हिस्सा है, और नेटवर्क18 इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट द्वारा नियंत्रित है, जिसका एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ है।


